दादाजी ।

by Shweta Mishra August. 04, 2018 1833 views

My handsome

My handsome

Artillery Days

Artillery Days


वीरता, दृढ़ता; ये दो शब्द के मेल थे वो

ठीक एक साल पहले दादाजी ने अलवीदा कहा

उनके चले जाने के बाद लोग अब लोग नहीं

घर अब घर नहीं...

उन्हें घूमने का बहुत शौक़ था

आज बलिया,

कल बनारस,

परसो बोकारो,

और फिर इलाहाबाद

बड़े दिलचस्प मुसाफिर थे...

बाबा, आपकी बाते याद आती है

फ़ौज, मित्र, दादी माँ, राजनीति...क्या दिन थे

अब सभी आपके पुराने तस्वीरो को देख कर दिल को तसल्ली देते है

अब बस हम यादो से गुज़ारा करते है...

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Sukanshika Vatsa 2 years, 2 months ago

Ghar me ab ek akhbaar kam aata hai! 
Dayum! 
Gave me chills! Very well written. Do write more!

2 years, 2 months ago Edited
Shweta Mishra Replied to Sukanshika Vatsa 2 years, 2 months ago

Thank you, Sukanshika! Will continue to do so! smile

2 years, 2 months ago Edited
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