माज़ी

by Shweta Mishra August. 19, 2020 193 views


ये घनी तन्हाइयो को गुमनाम रहने दो

मेरे माज़ी को अंधेरे में छुपा रहने दो

दिल सख्त है,

नज़रे स्थिर है,

हादसे नए है,

हक़ीक़त यही है,

यही होता है,

आख़िर यही होता क्यूँ है?

अब उस शाम को याद करे

खैर, अब क्यों तुमको बदनाम करे

हाय ये दिन! ये दिन कट भी जाए

बताओ ये रातें कैसे कटेगी?

आज मन लग भी जाए

कल के बाद ये राते भारी पड़ेगी

अब के बरसात में भीग रहे हो ना?

जो बात कह नहीं पा रही हु समझ रहे हो ना?

~श्वेता

Join the conversation
2
There are 2 comments , add yours!
Bidya Jha 3 months, 1 week ago

Beautiful 👌

3 months, 1 week ago Edited
Shweta Mishra Replied to Bidya Jha 3 months, 1 week ago

Thanks, bestie.

3 months, 1 week ago Edited
Up
Copyright @Photoblog.com