धूप-छाँव

by Shweta Mishra October. 02, 2020 133 views
(Image: © Samuel J. Hartman)

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तुम जब पास थे...फ़ासले बहुत थे

अब दूर हो तो कितने नज़दीक हो
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इन गुम-सुम राहों में सुनसान-ख़ामोशी हैं

आधी रात है

अब बहुत बेबसी है
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लोग नहीं ये चाँद जागता है मेरे साथ

अब लोग नहीं लोगो के लिए
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ये धूप-छाँव का खेल ठीक है

अब ये ग़म की कश्ती किनारा चाहती है
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आज देर रात आसमान को ताकते रहे

अंदर से बेचैन, बहार से शांत रहे
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आज फिर कुछ कमी सी थी...

आज फिर करीब आ कर दूरी भी थी...
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~श्वेता

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